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विशेष सूचना = सी ० आई ० बी ० एक राष्ट्रीय संगठन है | जिसमे संविधान का अनुपालन करना हमारा नैतिक कर्त्तव्य है| इसके सभी सदस्य अवैतनिक एवं स्वैछा से राष्ट्रीय सेवा हेतु स्वयं संकल्पित है | यदि कोई भी सी ० आई ० बी ० के नाम पर संविधान विरोधी काम करता है, तो वह स्वयं जिम्मेदार होगा | अनुदान राशि संस्था के खातें में जमा कर रशीद प्राप्त करें | नगद ना दें |- निदेशक :-

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’’अपराध’’ ये शब्द जितना साधारण लगता है उतना ही इसकी उत्पत्ति के कई अनगिनत कारण नजर आते है। कही यह मनोरंजन के लिए तो कहीं किसी मजबूरी के चलते पैदा होता है। 70 प्रतिशत मामलों में शासन-प्रशासन एवं लोकल अथॉरिटी जिम्मेदार होती है जो सीधे-साधे जीवन-यापन करने वाले को प्रताडि़त कर खुॅखार बनाती है, गैंगवार ,दबंगई , बाहुबली और नक्शलवाद इसकी परिनीति है। इसे रोका जा सकता था कोई भी विवेकशील ग्रामीण या शहरी अपनी रोजमर्रा की खुशहाल जिंदगी को छोड़कर अपराध नहीं करना चाहेगा अगर उसे छेड़ा ना जाय उसके निजी हितों को नुकसान न पहुॅचाया जाय। पारिवारिक अपराध, जलन एवं स्वार्थ के कारण उपजते है, तो सामाजिक अपराध अधिक लालसा विकृत मानसिकता के चलते पैदा होते है इसे उसी स्तर पर तत्काल प्रभाव से रोकने का प्रयास होना चाहिए पर करेगा कौन? कौन अपनी जिम्मेदारी महसूस करेगा? कौन अपना समय इन सब बातों के लिए खर्च करेगा? जिन्हें इनकी जिम्मेदारी सौपी जाती है तो वे इसका दुरूपयोग करके पैसे बनाने का जरिया तलाशने लगते है और बात और बिगड़ते चली जाती है आज रक्षक ही भक्षक बन गये है, कुछ सामाजिक सगंठन अगर अपना दायित्व समझती भी है तो अधिकारों एवं विधियाँ इनके सहायता के बगैर बिना दांत का हाथी साबित हो जाती है। आज हर स्तर पर क्राइम हो रहे है कुछ दिख रहा है, कुछ को जानबुझकर छुपाया जाता है तो कुछ का पता ही नहीं चलता। जरूरत है तो जागरूकता की। संगठित रूप से अपराध के खिलाफ उसकी पृष्ठभूमि के खिलाफ लड़ने की। आखिर कभी न कभी तो किसी को सोचना ही होगा शुस्आत चाहे जब हो, क्राइम कोई भी हो उसका निवारण ,छानबीन एवं उसकी परिणती होना जरूरी है। संगठित रूप से हम सिर्फ उसका सामना कर सकते है और कोशिश कर सकते है कि क्राइम होने से पहले उसका हल निकाल लिया जा सके तभी अपराध को कम कर सकते है। आइये हम और आप मिलकर इस अपराध पर अंकुश लगानें में एक कदम पहल करें।
’देश जगेगा तो, विश्व जगेगा।’
!!जयहिन्द!!